143 साल पुराना है गुजरात का मोरबी ब्रिज, राजा दरबार में जाने के लिए करते थे ब्रिज का इस्तेमाल।

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मोरबी ब्रिज का इतिहास बेहद पुराना है। ब्रिटिश इंजीनियरिंग का नमुना था ये मोरबी ब्रिज। लेकिन 30 अक्टूबर को हुआ बेहद दुखद हादसा जिसमें ब्रिज टूटने से कई लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। आइए जानते है इस ब्रिज से जुड़ी ख़ास बातें।

गुजरात के मोरबी की शान कहलाने वाला केबल ब्रिज 143 साल पुराना है मोरबी के राजा प्रजावत्स्ल्य वाघजी ठाकोर की रियासत के दौरान इस केबल ब्रिज को बनवाया था। इसका उद्घाटन 1879 में हुआ था इस केबल ब्रिज से होकर राजा वाघजी राजमहल से राज दरबार तक जाते थे।

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ब्रिटिश इंजीनियरों द्वारा बनाए गए केबल ब्रिज के निर्माण में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल हुआ था। राजकोट जिले से 64 किमी. दूर मच्छू नदी पर बना ये केबल पुल लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र था। पुल की लंबाई 765 फुट थी और चौड़ाई 4 फूट रही थी।

एतिहासिक पुल होने की वजह से इसे गुजरात टूरिज्म की लिस्ट में शामिल किया गया था।

बता दें कि 30 अक्टूबर को गुजरात के मोरबी जिले में मच्छु नदी पर बना हैंगिंग ब्रिज टूट गया था जिससे करीब 143 लोगों की मौत हो चुकी है। ब्रिज टुटने की वजह अधिक ज्यादा संख्या में लोगों का ब्रिज पर इक्कठा होना था। अभी तक 143 मृत लोगों को मच्छू नदी से निकाला गया है। जानकारों की माने तों अभी कई लोगों के मरने की आशंका जताई जा रही है।         

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