भारत ने सीजन 2022 के दौरान लद्दाख ने 35 एमटी ताजा खुबानी का निर्यात किया।

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सरकार लद्दाख की खुबानी का निर्यात बढ़ाने की कोशिश कर रही है… इसी मकसद के तहत  खुबानी मूल्य श्रृंखला के हितधारकों को सहायता देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है… वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ये काम एपीडा के माध्यम से  ‘लद्दाख एप्रिकोट’ यानी लद्दाख खुबानी ब्रांड के तहत कर रहा है…

दूसरी ओर एपीडा ने 14 जून, 2022 को लेह में एक अंतर्राष्ट्रीय क्रेता-विक्रेता बैठक का भी आयोजन किया था…ये  ऐसा समय था जब खुबानी की खेती का सीजन शुरू होने वाला था…  इस बैठक में  भारत, अमेरिका, बांग्लादेश, ओमान, दुबई और  मॉरीशस जैसे देशों के 30 से ज्यादा खरीदार जुटे थे … इस बैठक का असर हुआ और 2022 सीजन के दौरान पहली बार लद्दाख से 35 टन ताजा खुबानी का अलग-अलग देशों को निर्यात हुआ

माना जा रहा है कि  इस कदम से खुबानी के किसानों को फायदा मिलेगा… एपीडा ने पिछले साल  लद्दाख से ताजा खुबानी फलों के निर्यात की पहचान की थी और खुबानी सीजन 2021 के अंत में दुबई को इसकी आपूर्ति भी की गई थी… अनूठे स्वाद और सुगंध के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी खासी मांग थी…

एपीडा ट्रांस-हिमालयी लद्दाख की खुबानी का बेहतर मूल्य प्राप्त करने के उद्देश्य से ताजा खुबानी, परिवहन प्रोटोकॉल और ‘लद्दाख खुबानी’ ब्रांड के प्रचार के लिए पैकेजिंग को मजबूत करने पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है। यह क्षेत्र इनकी बेहतर गुणवत्ता के लिए जाना जाता है।

लद्दाख खुबानी के लिए जीआई टैग हासिल करने की दिशा में भी काम जारी है। विशेष रूप से, लद्दाख में उत्पादित खुबानी का बड़ा हिस्सा स्थानीय स्तर पर खा लिया जाता है और इसकी कम मात्रा ही शुष्क रूप में बेची जाती है।

एपीडा के मुताबिक दुबई में पहुंची पहली खुबानी खेप

एपीडा ने वर्ष 2021 के दौरान केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख से ताजा खुबानी फलों के निर्यात की पहचान की थी और खुबानी सीजन 2021 के अंत में परीक्षण के तहत इसकी दुबई को आपूर्ति की गई थी।

इसके अनूठे स्वाद और सुगंध के कारण उत्पाद की स्वीकार्यता के साथ ही अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उत्पाद की खासी मांग थी।

एपीडा ने 14 जून, 2022 को लेह में एक अंतर्राष्ट्रीय क्रेता-विक्रेता बैठक का भी आयोजन किया था, जो खुबानी की खेती का सीजन शुरू होने से ठीक पहले हुई थी।

केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख से खुबानी और अन्य कृषि उत्पादों के उत्पादकों और आपूर्तिकर्ताओं के साथ संवाद के लिए भारत, अमेरिका, बांग्लादेश, ओमान, दुबई, मॉरिशस आदि देशों के 30 से ज्यादा खरीदार एकजुट हुए थे।

इसके परिणामस्वरूप 2022 सीजन के दौरान पहली बार लद्दाख से 35 एमटी ताजी खुबानी का विभिन्न देशों को निर्यात किया गया। परीक्षण के तहत 2022 सीजन के दौरान सिंगापुर, मॉरिशस, वियतनाम जैसे देशों को भी शिपमेंट भेजी गई।

15,789 टन के कुल उत्पादन के साथ लद्दाख देश का सबसे बड़ा खुबानी उत्पादक है जो कुल उत्पादन का लगभग 62 प्रतिशत है। इस क्षेत्र में लगभग 1,999 टन सूखी खुबानी का उत्पादन किया, जिससे यह देश में सूखी खुबानी का सबसे बड़ा उत्पादक बन गया है। लद्दाख में खुबानी की खेती का कुल क्षेत्रफल 2,303 हेक्टेयर है।

देसी खुबानी की खुबियां और गुणवत्ता

लद्दाख की देशी खुबानी जीनोटाइप में बेजोड़ और कई अहम खूबियां हैं, जिनमें उच्च टीएसएस कंटेंट, देर से और ज्यादा समय तक फूल आना और फल का पका रहना, सफेद सीड स्टोन फेनोटाइप शामिल हैं। इसे दुनिया भर में विभिन्न देशों को निर्यात किया जा सकता है।

लद्दाख की खुबानी की विशेषता और प्रीमियम गुणवत्ता को देखते हुए लद्दाख के वैश्विक परिदृश्य में खुबानी उत्पादन और निर्यात के केंद्र के रूप में उभरने की पर्याप्त संभावनाएं हैं।

कड़वी और मीठी खुबानी की पहचान करना

लद्दाख की खुबानी को उसके स्वाद और स्टोन कलर के आधार पर दो श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है। कड़ुवी गुठली वाले फलों को खंते कहते हैं, जिसका मतलब है कड़ुवा। वहीं मीठी गुठली वाले फलों को न्यारमो कहा जाता है, जिसका मतलब है मीठा।

इन्हें सीड स्टोन कलर के आधार पर दो उप-समूहों में बांटा गया है। सफेद सीड स्टोन वाले फल को रक्तसे कार्पो (रक्तसे का मतलब है बीज, कार्पो का मतलब है सफेद), वहीं भूरे सीड स्टोन वाले फल को रक्तसे नाकपो यानी न्यारमो (काला बीज) कहा जाता है।

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