मिलिए इस अनोखे शाकाहारी मगरमच्छ से!

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मगरमच्छ एक बेहद खतरनाक जानवर है जो पलक झपकते ही अपने शिकार पर टूट पड़ता है। एक भूखे मगरमच्छ के सामने अगर कोई चला जाए तो इस बात का अंदाज़ा लगाना भी मुश्किल है कि मगरमच्छ उसके साथ क्या करेगा। लिहाज़ा कोई भी मगरमच्छ जैसे खतरनाक जानवर के करीब जाने के बारे में भी नहीं सोच सकता।

लेकिन अगर आपसे कोई कहे कि अपने जबड़ों से हड्डियों का चूरमा बना देने वाला मगरमच्छ शाकाहारी हो सकता है तो क्या आप यकीन करेंगे। जी हां बिल्कुल सच है, केरल के एक मंदिर में एक शाकाहारी मगरमच्छ है जो मांस नहीं बल्कि मंदिर का प्रसाद खाता है….केरल के अंनथपुरा लेक टेंपल में मौजूद इस मगरमच्छ का नाम है बबिया। यह मगरमच्छ अनंथपुरा मंदिर के तालाब में रहता है। शाकाहारी होने के साथ-साथ यह मगरमच्छ मंदिर की रखवाली भी करता है। लोग इस मगरमच्छ को मंदिर का पुजारी मानते हैं। यह मगरमच्छ पूरी तरह सातविक है और किसी को भी नुकसान नहीं पहुंचाता। जिस तालाब में बबिया नाम का यह मगरमच्छ रहता है उसमें ढेरों मछलियां हैं लेकिन बबिया जी तो सिर्फ गुड़ और चावल से बना प्रसाद ही खाते हैं। कहा जाता है कि पिछले 150 सालों से इस तालाब में मगरमच्छ हैं लेकिन एक बार में सिर्फ एक ही मगरमच्छ यहां दिखता है। पिछले 60 सालों से इस मंदिर में बबिया नाम का यह मगरमच्छ ही रह रहा है.

इस अनोखे मगरमच्छ ने प्रकृति के उलट जाकर अपनी फूड हैबिट्स को बिल्कुल ही बदल दिया है। लोग दूर-दूर से इस मगरमच्छ के दर्शन करने के लिए आते है। लोग मंदिर में जो प्रसाद चढ़ाते है मंदिर के पुजारी बबिया को वहीं प्रसाद खिलाते हैं।

बाहर से आने वाले लोगों को बबिया के पास जाने की इजाज़त नहीं है। सिर्फ मंदिर के पुजारी ही बबिया को खाना खिलाने या उसकी देख-रेख करने के लिए तालाब में जा सकते हैं।

इस तरह के मगरमच्छ के बारे में जानकर तो यही साबित होता है कि भारत एक ऐसा देश हैं जहां ढेरों अजूबे देखने को मिलते हैं। इस मंदिर में मगरमच्छ का वैजीटेरियन होना भी किसी अजूबे से कम नहीं या फिर यूं कहे कि इसमें भगवान की कोई महिमा छिपी है।

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