भारत में बड़ी कंपनियां कर रही कर्मचारियों की छटनी, क्या यह मंदी के आसार है।

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क्या साल 2023 में दुनियाभर में एक बार फिर रिसेशन यानि मंदी आ सकती है। कई अर्थशास्त्री मंदी की आहट को मसहूस कर रहे हैं और उनका दावा है कि साल 2023 तक मंदी दुनियाभर में अपने पैर पसार सकती है। बैंक ब्याज दरों में लगातार इज़ाफा कर रहे हैं, होम लोन और कार लोन महंगे हो रहे हैं यह इस बात की ओर इशारा करता है कि दुनिया एक बार फिर मंदी के दलदल में फंसने जा रही है।

मंदी आने से होने वाले नुकसान

अगर मंदी आती है तो इसका सबसे ज़्यादा नुकसान नौकरीपेशा लोगों को होगा। भारत जैसे देश में नौकरी करने वाले लोगों के लिए यह काफी बड़ी चिंता का विषय है। जब से दुनिया में मंदी का खतरा बढ़ा है, तब से बड़ी-बड़ी कंपनियों से छटनी की खबरें सामने आ रही हैं। हाल ही में HCL TECHNOLOGIES ने वैश्विक स्तर पर बड़ी छंटनी की है। इसके तहत कंपनी ने अपने 350 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया है। वहीं देश की कुछ नामी कंपनियां भी कर्मचारियों की छटनी करने का मन बना चुकी हैं। कोरोना महामारी के बाद जैसे-तैसे अर्थव्यवस्था कुछ हद तक पटरी पर लौटी थी, लेकिन इसके बाद रूस और युक्रेन के बीच छिड़े युद्ध की वजह से हालात एक बार फिर खराब होते दिख रहे हैं।

आर्थिक मंदी से क्या होता है।

जानकारों का मानना है कि पूरी दुनिया में साल 2008 की ही तरह मंदी आ सकती है। मंदी एक ऐसी स्थिति है जब आर्थिक गतिविधियां धीमी पड़ने लगती है या कुछ हद तक रूक जाती हैं। ब्याज दरों के बढ़ने से आम लोगों के साथ-साथ कंपनियों के लिए कर्ज़ लेना महंगा हो जाता है और इससे कंपनियां विस्तार करने लिए लोन लेना कम कर देती हैं दूसरी ओर उपभोगता भी खर्च करना कम कर देते हैं। इसका असर यह होता है कि आर्थिक लेन-देन और गतिविधियों की रफ़्तर थमने लगती है और बाज़ार में आ जाता है रिसेशन।

वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया गया है कि अमेरिका, चीन और यूरोप के कई बड़े देशों की अर्थव्यवस्था में काफी ज़्यादा गिरावट दर्ज की जा रही है।

भारत जैसा देश जहां एक बड़ी जनसंख्या नौकरियों पर निर्भर है अगर वहां मंदी आती है, तो एक बड़ा वर्ग इससे प्रभावित होगा। मंदी का असर न सिर्फ़ नौकरीपेशा लोगों पर पड़ेगा, बल्कि छोटे व्यापारियों और देश की जीडीपी यानी सकल घरेलू उत्पाद भी इससे प्रभावित होगी। गौरतलब है कि बढ़ती महंगी और रुपये में लगातार गिरावट के बीच मंदी का आना आर्थिक रूप से काफी नुकसानदेह साबित हो सकता है।

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