भारत में तिरंगा फहराने से जुड़े इन नियमों को जान लें

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एक भारतीय होने के नाते हम सभी को अपने राष्ट्रीय ध्वज यानि तिरंगे पर गर्व है। इसलिए, जब भी आप तिरंगे को फहराए, तो यह ज़रूरी है कि उससे जुड़े नियमों का पालन किया जाए। आएये देखते हैं कि तिरंगे को फहराने के क्या नियम हैं, जिसका पालन करना ज़रूरी है।

तिरंगे को फहराते समय दिया जाना चाहिए सम्मान

जब कभी भी तिरंगे को फरहाया जाए, तो उसे पूरा सम्मान दिया जाना चाहिए. साथ ही, तिरंगे को ऐसी जगह पर लगाया जाना चाहिए जहां वह पूरी तरह से नज़र आए।

अगर किसी सरकारी भवन पर झंडा फहराने का प्रचलन है, तो उस सरकारी इमारत पर रविवार और छुट्टियों के दिन भी तिरंगे को फहराना ज़रूरी है।

तिरंगे को सुर्योदय से सूर्यास्त तक फहराया जाना चाहिए, भले ही मौसम कैसा भी हो। ऐसी इमारतों में रात के समय भी झंडा फहराया जा सकता है, लेकिन ऐसा सिर्फ रात के समय ही किया जाना चाहिए।

तिरंगे को इस तरह फहराया जाना चाहिए

तिरंगे को हमेंशा तेज़ी से फहराया जाना चाहिए। हालांकि, इसे धीरे-धीरे और सम्मान के साथ उतारा जाना चाहिए। जब कभी भी झंडे को बिगुल के साथ फहराया जाता है, तो इस बात का ख्याल रखा जाना चाहिए कि झंडे को बिगुल की आवाज़ के साथ ही फहराया जाए और उतारा जाए।

जब भी झंडा किसी इमारत की खिड़की, बालकनी या अलगे हिस्से से आड़ा या तिरछा फहराया जाए, तो झंडे की केसरी पट्टी सबसे दूर वाले सिरे पर होगी।

जब भी झंडे को किसी दीवार के सहारे आड़ा और चौड़ाई में प्रदर्शित किया जाता है, तो केसरी पट्टा का सबसे ऊपर होना ज़रूरी है। साथ ही, जब वह लंबाई में फहराया जाए, तो केसरी पट्टी झंडे के हिसाब से दाईं ओर होगी। इसके अलावा, वह झंडे को सामने से देखने वाले व्यक्ति के बाईं ओर होगी।

तिरंगा फहराने का नियम

अगर किसी सभा मंच पर तिरंगे को लगाया जाता है, तो उसे इस तरह फहराया जाएगा कि जब वक्ता (भाषण देने वाला व्यक्ति) का मुंह श्रोताओं की ओर हो, तो झंडा उनके दाहिनी ओर रहे। अगर ऐसी स्थिति नहीं है, तो झंडे को दीवार के साथ वक्ता के पीछे और उससे ऊपर आड़ा फहराया जाए।

किसी प्रतिमा के उद्घाटन के अवसर पर झंडे को सम्मान के साथ और अलग तरह से प्रदर्शित किया जाना चाहिए।

जब कभी भी तिरंगे को किसी गाड़ी या मोटर कार पर लगाया जाता है, तो उसे बोनट के आगे बीचोंबीच या कार के आगे दाईं और कसकर लगे हुए एक डंडे पर फहराया जाना चाहिए.

जब भी कभी तिरंगे को परेड या जुलूस में लेकर जाया जा रहा हो, तो वह मार्च करने वाले लोगों के दाईँ ओर यानि झंडे के भी दाहिनी ओर रहेगा या अगर किसी दूसरे झंडे की भी कोई लाइन हो, तो राष्ट्रीय झंडा उस लाइन के बीच में आगे होगा।

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