भारत में कब और कैसे हुई बिरयानी की शुरुआत

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भारत में हर घर में खिचड़ी और पुलाव आम तौर पर खाया जाता है। ज़्यादातर घरों में हफ़्ते में दो से बार तो यह दिश बन ही जाती है। इसके अलावा, एक और खास दिश है जिसे भारत में हर जगह काफी पसंद किया था है और वह है बिरयानी। बात चाहे पार्टी की हो या किसी खास समारोह की बिरयानी को काफी पसंद किया जाता है। बिरयानी और पुलाव में एक बुनियादी फर्क है और वह है इसे बनाने की रेसिपी। बिरयानी खाने का शौख रखने वालों यह भी पता होना चाहिए कि आखिर बिरयानी की शुरुआत कब और कैसे हुई थी, ताकि अगली बार जब आप बिरयानी का टेस्ट लें तो आप इस दिलचस्प इतिहास को अपने दोस्तों के साथ मज़े से बिरयानी का लुत्फ़ लेते हुए साझा कर सकें।

बिरयानी का इतिहास

बिरयानी के इतिहास पर नज़र डालें, तो भारत में मुगलों ने बिरयानी की शुरुआत की थी। उस समय ये मुगलों के शाही खाने का हिस्सा हुआ करती थी। कहा जाता है कि मुगल बादशाह शाहजहां की बेगम मुमताज़ महल ने बिरयानी को शाही रसोईघर में शामिल करवाया था।

इतिहासकारों के मुताबिक

इतिहासकारों के मुताबिक शाहजहां की फौज को सेहतमंद बनाने के लिए मुमताज़ महल ने शाही खानसामों को एक ऐसा आहार इजात करने के लिए कहा जिससे उन्हें संतुलित आहार मिले। इसके बाद, शाही खानसामों ने चावल और मीट को मिलाकर कई तरह के प्रयोग करने शुरू किए, जिसके बाद आज के दौर की बिरयानी का स्वरूप सामने आया। धीरे-धीरे बिरयानी के लिए सभी लोगों की दीवानगी ऐसी बढ़ी कि हर कोई इस डिश का दीवाना हो गया। कुछ इतिहासकार यह भी बताते हैं कि उस दौर में शाही घरानों में मेमने के मीट की बिरयानी को काफ़ी ज़्यादा पसंद किया जाता था।

आज के समय में भारत में कई तरह की बिरयानी मिलती है। आज भारत में हर जगह अलग-अलग तरह की बिरयानी मिलती है, इसमें लखनवी बिरयानी, हैदराबादी बिरयानी, मुग़लई बिरयानी शामिल है।  

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