भारत में कब और किसने बनाया पहला मदरसा

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मदरसा शब्द से आप क्या समझते है। मदरसा शब्द अरबी: مدرسة‎‎, मद्रसह, ब. व्। مدارس, मदारिस से लिया गया है।

भारत में मदरसों का इतिहास बेहद पुराना है इतिहास के पन्नों पर नज़र डालें तो, करीब 1000 साल पहले की बात है उस समय मदरसों का एक वैभवशाली इतिहास हुआ करता था। भारत में मदरसों के इतिहास पर नजर डालें तो इसकी शुरुआत मुगल काल के दौरान ही हुई थी।

जानकारों की मानें तो, मोहम्मद गौरी के शासनकाल के दौरान भारत में पहले मदरसे की स्थापना हुई थी। सन् 1192 में राजस्थान के अजमेर शहर में पहला मदरसा खोला गया था। हालांकि UNESCO के मुताबिक भारत में 13वीं शताब्दी में मदरसों की शुरुआत हुई थी।

अकबर ने मदरसों की शिक्षा में किया बदलाव

वहीं अकबर ने अपने शासनकाल के दौरान मदरसों में इस्लामिक शिक्षा के अलावा भी दूसरे विषयों को भी पढ़ाने का आदेश दिया था। जब खिलजी और तुगलक वंश का दौर आया, तब तक भारत में कई मदरसें स्थापित हो चुके थे।

वहीं आजादी से पहले भारत में अंग्रेजों ने भी कई मदरसों को खोला। सन, 1781 में वारेन हेस्टिंग्स ने कोलकाता में अंग्रेजी सरकार का पहला मदरसा खोला था।

ऐसा माना जाता है कि मुहम्मद बिन तुगलक का भाई और उत्तराधिकारी फिरोज शाह तुगलक ने सन् 1308 से 1388 तक के दौरान लोगों के बीच शिक्षा के महत्व को बताने काम किया था। वो अक्सर नौकरों और लड़कियों के लिए शिक्षा देने की वकालत करता था। फिरोज शाह ने अपने काल में करीब 1 लाख 80 हजार नौकरों को विज्ञान, हस्तकला और कला जैसे विषयों में शिक्षा दिलाई थी।

वहीं भारत में बतौर यात्री, मोरक्को के इब्न बतुता ने अपनी रचनाओ में बताया है कि भारत में लड़कियों के लिए करीब 13 मदरसे बनाए गए है। जहां से उन्हें शिक्षा ग्रहण करने का अवसर मिलता था। भारत के पहले राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद, समाज सुधारक राजा राम मोहन राय और कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद ने अपनी तालीम मदरसों से हासिल की थी।

भारत का सबसे बड़ा मदरसा

बता दें कि भारत का सबसे बड़ा मदरसा दारुल उलूम देवबन्द है। इसकी स्थापना उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में 1867 में मुहम्मद ओबिद सुसैन ने की थी।

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