भारत बन रहा है दुनिया का सबसे सस्ता दवाखाना

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भारत दुनिया के सबसे सस्ते दवाखाने के रूप में ऊभर रहा है, जिसका सीधा लाभ अब फ़ार्मा निर्यात को होने वाला है। भारत वैश्विक दवाखाने के तौर पर जाना जाता है। इसकी वजह यह है कि दुनिया के लगभग 150 देशों में किसी न किसी रूप में भारतीय दवाओं का निर्यात होता है।

साल 2020-21 और 22 के दौरान दुनिया में कोरोना अपने पैर पसार रहा था उस वक्त भारत को लेकर दुनियाभर के लोगों ने यह चिंता ज़ाहिर की थी कि इतनी बड़ी जनसंख्या वाला देश आखिर कोरोना जैसी महामारी से कैसे निपटेगा? लेकिन भारत ने स्वदेशी वैक्सीन बनाकर न सिर्फ़ इस महामारी पर काबू पाया, बल्कि दुनिया के दूसरे देशों को भी अपनी वैक्सीन देकर वहां के लोगों का उपचार किया।

विश्वस्तर पर सस्ते दवाखानों रुप में ऊभरता भारत।

भारत अब दुनिया में सस्ते दवाखाने के तौर पर ऊभर रहा है, क्योंकि विश्व की 20 प्रतिशत जेनेरिक दवाएं भारत से सप्लाई की जाती है। कैंसर और एचआइवी जैसी घातक बीमारियों के लिए भारत में जो दवाएं उपलब्ध हैं वे दुनिया के अन्य देशों की दवाओं के मुकाबले काफी सस्ती हैं। युक्रेन और रूस के बीच छिड़े युद्ध के बाद अब रूस ने भी भारतीय दवा की मांग को बढ़ा दिया है। वैसे तो अब तक दुनियाभर के ज़्यादातर देशों में भारतीय दवाओं की सप्लाई होती थी, लेकिन अब उन देशों तक भी भारत की दवाएं पहुंचेंगी जिन्हें अब तक भारतीय दवाओं पर बहुत ज़्यादा भरोसा नहीं था।

साल 2020-21 में भारत से होने वाले दवाओं के निर्यात में 18 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। साल 2019-20 में यह आंकड़ा इस निर्यात के मुकाबले 18 प्रतिशत कम था। बता दें कि भारत से होने वाले दवाओं के निर्यात का आकार लगभग 50 बिलियन डॉलर का है।

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