प्राचीन काल में महिलाएं सुंदर दिखने के लिए, मगरमच्छ की लीद लगाती थी।

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सुंदर दिखना किसे नही पसंद, चाहे वो महिला हो या पुरुष हर कोई चाहता है। कि वो दूसरों से सुंदर दिखे… दुनिया में आपकी सुंदरता के चरचे हो…सुंदर दिखने की लालसा युगों युगों से सबके मन में रही है। वहीं बात आज के समय की करें तो दुनियाभर में सौंदर्य यानि मेकअप का बाजार काफी बड़ा है और ये साल दर साल बढ़ता ही जा रहा है। करोड़ो रुपये में बिकने वाला मेकअप आज सबकी जरूरत बन चुका है।

प्राचीन काल से ही महिलाएं और पुरुष सुंदर दिखने के लिए कई तरह के तरीको को अपनाया करती थी जिन्हे जान कर आप हैरान हो जाएगे।  

रानी नेफरिती रोज लगाती थी इत्र

प्राचीन मिस्र की रानी नेफरिती की गिनती दुनिया की सुंदर महिलाओं में होती थी। मिस्र की महिलाएं नेफरिती की खुबसूरती और फैशनेबल तौरतरीकों की दिवानी थी। नेफरिती की सुंदरता को बढ़ाने का काम उनकी दासियां बहुत मश्कत करती थी उन्हे रोज जैतून के तेल और तमाम इत्रों से मसाज की जाती थी। साथ ही लेप लगाया जाता था। फिर केस, नयन, कर्ण, मुख और सुंदर कपड़े पहनाकर उन्हें सजाया जाता था।

क्लियोपेट्रा सुंदर दिखने के लिए मगरमच्छ की लीद लगाती थी।

मिस्र की रानी क्लियोपेट्रा सुंदर दिखने के लिए मगरमच्छ की लीद और गधे के दूध के मिश्रण से बना फेसपैक का इस्तेमाल करती थी। उन्होने सुंदर और युवा दिखने के लिए एक अलग विभाग बनाया जो क्लियोपेट्रा की सुंदरता के लिए तमाम युक्तियां और शोध करता था। साथ ही लंबे बाल रखने के लिए इज़ाज़त केवल राजसी खानदान के लोगों को थी दासियों को अपने लंबे बालों को काटकर उन्हें छोटा ही रखना पड़ता था।

16 श्रृंगार का मतलब

भारत में ही सोलह श्रृंगार की अवधारणा रही है। प्राचीन काल से ही सोलह श्रृंगार करने की बात कहीं गई है। सर से लेकर पेर के नाखुन तक का मेकअप सोलह श्रृंगार कहलाता है। भारत में महिलाएं मौसम और ऋतुओं के अनुसार लेप का इस्तेमाल अपनी सुंदरता को निखारने के लिए किया करती थी।

सौंदर्य प्रसाधन पर अंष्टांग हदय नाम की किताब

भारत में डेढ हजार साल पहले अष्टांग ह्द्या नाम से आठ ऋतुओं में सौदर्य प्रसाधनों पर एक किताब लिखी गई थी। प्राचीन भारत में सुंदर दिखने के लिए तैलम यानि तेल और घृत यानि मक्खन और घी का इस्तेमाल किया जाता था। इतना ही नही भारत में धार्मिक तौर पर दांतों, मुंह और होठों की सज्जा पर काफी जोर दिया जाता था इससे सौंदर्य और स्वच्छता दोनों हो जाती थी।

इसके अलावा मुगल महिलाओं का मानना था कि पान के पत्ते चबाने से सौंदर्य बढ़ता है। पान के पत्तों को खाने उनके होठ लाल रहते थे। वहीं जापान में महिलाओं की सुंदरता लंबे बालों से मापी जाती थी जिस महिला के बाल कमर से कम से कम दो फीट नीचे होते थे वो महिला सुंदर मानी जाती थी। जबकि ब्रिटेन में महिलाएं स्लिम-ट्रिम दिखने के लिए खुशी खुशी फीताकृमि निगल जाती थी साथ ही ब्रिटेन महिलाएं कच्चे अंडे के सफेद हिस्से का इस्तेमाल चेहरे की सुंदरता को निखारने के लिए करती थी।

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