ज्ञानवापी मस्जिद मामले में हिंदु पक्ष में आया कोर्ट का फैसला

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ज्ञानवापी मस्जिद-श्रृंगार गौरी मंदीर के मामलो को लेकर चल रही सुनवाई पर अब कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने इस मामले को सुनवाई के लायक मान लिया है और इस मामले को लेबर अब अगली सुवनाई 22 सिंतबर को होगी। कोर्ट के इस फैसले के बाद हिंदु पक्ष काफ़ी खुश है, तो वहीं मुस्लिम पक्ष इस मामले को लेकर अब हाई कोर्ट जा सकता है।

ज्ञानवापी मस्जिद का सच

श्रृंगार गौरी मंदिर में पूजा-अर्चना को जिला कोर्ट के जज अजय कृष्ण विश्वेश ने सुनवाई के लायक बताया है। कोर्ट ने अपना फैसला हिंदु और मुस्लिम दोनों पक्षों को सुनने के बाद सुनाया। वाराणसी में अदालत के इस फैसले के आने के बाद लोग इतने खुश नज़र आए कि वे हर-हर महादेव के नारे लगाने लगे।

बीते कुछ समय से काशी विश्वनाथ मंदिर के साथ लगी ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर विवाद चल रहा है। कुछ समय पहले कोर्ट के आदेश पर ज्ञानवापी मस्जिद में तीन दिन तक सर्वे और वीडियोग्राफ़ी का कार्य किया गया था। बताया जाता है कि ज्ञानवापी को लेकर आज़ादी से पहले भी कई विवाद हो चुके हैं।

ज्ञानवापी मस्दिज का विवाद है क्या

इस मामले को लेकर चल रहे विवाद के कारण कोर्ट ने आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया को ज्ञानवापी मस्जिद का तीन दिन तक सर्वे करने का आदेश दिया था। इस सर्वे के दौरान मस्जिद परिसर में एक शिवलिंग के मिलने का दावा किया गया था। इसके अलावा, सर्वे की रिपोर्ट में परिसर की दीवार पर देवी-देवताओं की कलाकृतियां, कमल की कलाकृतियां, शेषनाग की आकृति वगैरह मिलने की बात कही गई थी।

बता दें कि ज्ञानवापी मस्जिद वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर से सटी हुई है. ऐसा दावा किया जाता है कि मंदिर को तोड़कर ज्ञानवापी मंदिर का निर्माण किया गया था। यही वजह है कि हिंदु पक्ष यह मांग कर रहा है कि पूरी ज्ञानवापी मस्जिद हिंदुओं को सौंपी जाए, जबकि मुस्लिम पक्ष लगातार इस बात का विरोध करता आया है। फिलहाल इस मस्जिद की देख-रेख की ज़िम्मेदारी अंजुमन इंतेज़ामिया मस्जिद कमेटी की है। इस मामले को लेकर पहली बार 1991 में वाराणसी की अदालत में मुकदमा दाखिल किया गया था।

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