किसी ज़माने में करंसी के तौर पर इस्तेमाल की जाती थी चॉकलेट!

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शायद है कोई व्यक्ति ऐसा होगा जिसे ‘चॉकलेट’ न पसंद हो। चॉकलेट के लिए बच्चों की दीवानगी तो देखते ही बनती है। आज-कल स्वीटडिश से लेकर आइसक्रीम्ज़ तक हर चीज़ में चॉकलेट का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, बहुत से लोगों को यह नहीं पता कि चॉकलेट खाने की शुरुआत कैसे हुई और दुनियाभर में लोग कैसे चॉकलेट के दीवाने होते चले गए।

चॉकलेट का इतिहास

चॉकलेट कोकोआ बींस से बनाई जाती है। माना जाता है कि मध्य अमेरिका में रहने वाले माया (Mayans) सभ्यता के लोग ने पहली बार चॉकलेट की शुरुआत की थी। माया सभ्यता के लोगों का मानना था कि कोकोआ की बींस को पीसकर एक अच्छी ड्रिंक बनाई जा सकती है। उन्होंने ऐसा ही किया और कोकोआ बींस को पीसकर चॉकलेट की ड्रिंक बनाने लगे। इसके बाद कुछ समय तक माया सभ्यता के लोग चॉकलेट को खाते नहीं बल्कि पिया करते थे।

इसके बाद कोकोवा का इस्तेमाल करंसी के तौर पर होना शुरू हो गया। लोग पैसे की जगह लेन-देन के लिए कोकोआ बींस का इस्तेमाल किया करते थे। इतना ही नहीं उस ज़माने में लोग टैक्स के रूप में भी कोकोआ बीन्स ही दिया करते थे। यानी ये वह दौर था जब पैसों की जगह लोग कोकोआ बीन्स का इस्तेमाल किया करते थे जिससे चॉकलेट बनाई जाती है।

माना जाता है कि क्रिस्टोफ़र कोलंबस चॉकलेट को यूरोप लेकर पहुंचा था। लेकिन कोलंबस इस बात का अंदाजा नहीं लगा सका कि चॉकलेट कोकोआ बीन्स कितनी कीमती हो सकते हैं। कोलंबस के साथ डॉन हरनेस कॉर्टेस इस बात को समझा कि चॉकलेट की व्यापार के लिए किस तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

उसने यूरोप के लोगों के बीच चॉकलेट का प्रचार किया और धीरे-धीरे यूरोप में चॉकलेट के प्रति लोगों की दिलचस्पी बढ़ने लगी।

इतिहासकारों का मानना है कि सन 1847 में चॉकलेट बनाने वाली एक कंपनी फ्राइज़ चॉकलेट फैक्ट्री ने पहली चॉकलेट बार बनाई। उन्होंने चॉकलेट बनाने के लिए उसमें कुछ इंग्रीडिएंट्स का इस्तेमाल किया और उसे मार्केट में उस रूप में ग्राहकों के लिए उतारा जिस रूप में आज हमें बाज़ार में चॉकलेट मिलती है।

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