पैसा बचाने के लिए, अमेरिका में बच्चों को कोरियर किया जाता था।

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एक समय में, अमेरिकी की डाक सेवा के माध्यम से बच्चों को भेजना कानूनी था। 20वीं सदी की शुरुआत में बड़े पार्सल भेजना एक चलन सा बन गया था।

बात है 1910 के दशक की, जब बच्चों के साथ यात्रा करना काफी मुश्किल हुआ करता था। बच्चों के साथ यात्रा करने के लिए अभिभावकों को अधिक कीमत चुकानी पड़ जाती थी।

साल 1913 की 1 जनवरी के मध्य के दौरान अमेरिका के पार्सल पोस्ट सर्विस ने पैकेज भेजने के नियम को लाए, बच्चों पर लगने वाले टिकट के खर्चे को बचाने के लिए अभिभावकों ने बच्चों को कोरियर के जरिए एक जगह से दूसरी जगह भेजना शुरु कर दिया था।

पार्सल पोस्ट सर्विस के नियमो के मुताबिक।

बच्चो को पार्सल करने के लिए कुछ नियमों को भी बनाए गया, अगर अभिभावक बच्चों को पार्सल करते है तो उन्हें खास छूट मिलेगी। वहीं भेजने वाले पैकेज का वजन 22 किलों से कम होना चाहिए।

पार्सल पोस्ट की इस सुविधा का लाभ उठाते हुए, अभिभावक अपने बच्चों को रिश्तेदारों, दादा दादी, नाना नानी के घर भेजने लगे।

बच्चों को मेल करने से पहले उनकी पोकेट में 15 सेंट के डाक टिकट को लगाया जाता था उसके बाद उन्हे ट्रैन की पार्सल बोगी में रख दिया जाता था।

हालांकि बाद में इस सेवा को बंद कर दिया गया।             

बच्चों को पार्सल करने की बात और फोटो पूरे अमेरिका में आग की तरह फैली। और लोगों ने इसपर काफी हंगामा भी किया। जैसे ही ये बात पोस्टमास्टर जनरल तक पहुंची, तो उन्होंने तुरंत ही इस सेवा की निंदा करते हुए इसपर प्रतिबंध लगा दिया।

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